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  • 2026-05-12

Jharkhand News: झारखंड के विधायकों पर मेहरबान हुआ सरकार, हेल्थ किट और लग्जरी बैग पर फूंके 36 लाख, प्रशासनिक मंजूरी मिली

Jharkhand: झारखंड सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायकों को बांटी गई विभिन्न सामग्रियों पर हुए भारी-भरकम खर्च को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विधायकों के लिए हेल्थ किट और लग्जरी ट्रॉली बैग की खरीद पर कुल 35.98 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से इस खर्च की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। यह पूरी खरीद वित्तीय वर्ष 2025-26 के विभागीय बजट पर चर्चा के दौरान की गई थी, जिसका उद्देश्य सत्र के दौरान विधायकों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

महंगे हेल्थ किट और अत्याधुनिक मशीनें
जानकारी के अनुसार, इन सामग्रियों की खरीद पारदर्शी तरीके से सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से संपन्न की गई। विभाग ने कुल 225 मेडिकल और हेल्थ किट खरीदे, जिसमें एक किट की कीमत 6,420 रुपये निर्धारित थी। इन हेल्थ किटों की खरीद पर कुल 14.44 लाख रुपये का खर्च आया है। इस किट की खासियत यह थी कि इसमें विधायकों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए नेबुलाइजर मशीन, बीपी मॉनिटर, स्टेथोस्कोप, ग्लूकोमीटर और फर्स्ट एड किट जैसे जीवन रक्षक उपकरण शामिल थे। इसके अतिरिक्त, मांसपेशियों के दर्द और आराम के लिए किट में मसाजर, नी कैप, एंकलेट और एक्यूप्रेशर किट जैसी जरूरी चीजें भी मुहैया कराई गई थीं।

लग्जरी ट्रॉली बैग पर खर्च हुए लाखों
हेल्थ किट के अलावा विधायकों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए विभाग ने 140 उच्च गुणवत्ता वाले ट्रॉली बैग की भी खरीद की। प्रत्येक ट्रॉली बैग की कीमत 15,384 रुपये रही, जिस पर सरकारी खजाने से कुल 21.53 लाख रुपये खर्च किए गए। इतनी अधिक कीमत वाले बैग और स्वास्थ्य उपकरणों के वितरण को लेकर अब प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या जनहित के अन्य मुद्दों के बजाय इन सुविधाओं पर खर्च करना कितना तर्कसंगत है।

योजना मद से होगा भुगतान
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी राशि का आवंटन राज्य योजना मद के तहत "पुरस्कार, प्रोत्साहन, प्रिंट, प्रचार, संगोष्ठी और कार्यशाला" के लिए निर्धारित बजट से किया गया है। विभाग ने इस खर्च का भुगतान चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य मद से करने का निर्देश दिया है। सरकार के इस फैसले और स्वास्थ्य मद के बजट का इस तरह उपयोग किए जाने को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी सवाल उठने लगे हैं।

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