NEET Paper Leak 2026: मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर से चर्चित कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है. छात्रों के बीच "एम सर" के नाम से मशहूर मोटेगांवकर रेणुकाई करियर सेंटर (RCC) के संस्थापक हैं, जो महाराष्ट्र में नीट और जेईई की तैयारी कराने वाला सबसे बड़ा कोचिंग नेटवर्क है. सीबीआई ने सोमवार को आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि रविवार को लातूर में हुई छापेमारी के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र बरामद हुआ, जिसके बाद यह गिरफ्तारी की गई.
परीक्षा से 10 दिन पहले पेपर लीक
केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, शिवराज मोटेगांवकर नीट प्रश्नपत्र को लीक करने और उसे देश भर में प्रसारित करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है. जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मोटेगांवकर और उसके साथियों ने 23 अप्रैल 2026 को होने वाली नीट परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही पूरा प्रश्नपत्र और उसके उत्तर (आंसर की) हासिल कर लिए थे. इसके बाद इस लीक पेपर को कई अन्य लोगों और परीक्षार्थियों को मोटी रकम के बदले वितरित किया गया था. इस मामले में विवेक पाटिल नाम का एक अन्य शख्स भी सीबीआई के रडार पर है, जिसे यह पेपर भेजा गया था.
एनटीए कनेक्शन और फोरेंसिक जांच
सीबीआई की टीम पिछले चार दिनों से लातूर में डेरा डाले हुए है और रविवार को शिवनगर स्थित आरसीसी के मुख्य कार्यालय में दोपहर से लेकर देर शाम तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया. इस छापेमारी के दौरान कोचिंग संस्थान से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड और डिजिटल स्टोरेज सिस्टम जब्त किए गए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इस कोचिंग नेटवर्क के किसी सदस्य की सीधी पहुंच गोपनीय परीक्षा सामग्री तक थी या फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर सेटिंग प्रोसेस से जुड़े किसी अंदरूनी अधिकारी के साथ इनके तार जुड़े थे.
कोचिंग एम्पायर और डॉक्टरों पर शक
केमिस्ट्री टीचर के रूप में करियर शुरू करने वाले शिवराज मोटेगांवकर ने महाराष्ट्र के कई जिलों में आरसीसी का एक विशाल कोचिंग एम्पायर खड़ा कर रखा है, जहां हर साल लगभग 40 हजार छात्र मेडिकल की तैयारी करते हैं. सीबीआई इससे पहले भी लातूर और पुणे में मोटेगांवकर से कई घंटों तक पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन मोबाइल में पुख्ता सबूत मिलने के बाद उसे दबोच लिया गया. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को यह भी पुख्ता संदेह है कि लातूर के कुछ स्थानीय डॉक्टरों ने अपने बच्चों या करीबियों के लिए इस लीक प्रश्नपत्र को भारी कीमत चुकाकर खरीदा था, जिनकी पहचान की जा रही है.