Ebola Threat India Advisory: दुनिया के कुछ हिस्सों में जानलेवा "इबोला वायरस" के दोबारा पैर पसारने की खबरों के बीच भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी तरह सतर्क हो गया है. सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए झारखंड के सभी जिला सर्विलांस विभागों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की. इस ऑनलाइन बैठक में जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) से जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. असद और सुशील तिवारी समेत कई आला अफसर शामिल हुए. केंद्रीय टीम ने साफ किया कि यद्यपि देश में अभी तक इबोला का एक भी केस नहीं मिला है, लेकिन वैश्विक उड़ानों की वजह से लापरवाही भारी पड़ सकती है. इसी को देखते हुए मध्य और पश्चिम अफ्रीकी देशों से लौटने वाले प्रवासियों की सघन एयरपोर्ट स्क्रीनिंग के निर्देश जारी किए गए हैं.
कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से लौटने वालों के लिए केंद्र ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इस घातक बीमारी के फैलने की तस्दीक किए जाने के बाद भारत सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. केंद्र ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा करने वाले या वहां से भारत लौट रहे नागरिकों के लिए एक कड़क ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है. इसके तहत बाहर से आने वाले हर संदिग्ध मुसाफिर की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जाएगी ताकि संक्रमण को भारतीय सीमाओं में दाखिल होने से पहले ही रोका जा सके.
संक्रमण रोकने को तीन श्रेणियों में बंटा सुरक्षा चक्र, 21 दिनों का नियम अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्धों की पहचान और निगरानी के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षा घेरा तैयार किया है. पहली श्रेणी (सेल्फ मॉनिटरिंग) में प्रभावित देशों से लौटे उन लोगों को रखा गया है जो किसी मरीज के सीधे संपर्क में नहीं आए हैं; इन्हें 21 दिनों तक घर पर रहकर सेहत की खुद जांच करनी होगी. दूसरी श्रेणी (क्वारंटाइन) में उन यात्रियों को 21 दिनों के लिए कड़े क्वारंटाइन में डालना लाजमी किया गया है जो इबोला पीड़ितों के संपर्क में रहे हैं. वहीं, तीसरी श्रेणी (आइसोलेशन) में सीधे तौर पर लक्षण दिखने वाले गंभीर मरीजों को बिना देरी किए अस्पताल के विशेष वार्डों में भर्ती किया जाएगा.
झारखंड में टेस्ट की व्यवस्था नहीं, पुणे के राष्ट्रीय विषाणु संस्थान भेजे जाएंगे सैंपल
स्थानीय डॉक्टरों और सर्विलांस टीम के मुताबिक, फिलहाल जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड में इबोला वायरस की जांच के लिए कोई अधिकृत लैब मौजूद नहीं है. इस तकनीकी कमी को देखते हुए फैसला लिया गया है कि राज्य में कहीं भी कोई संदिग्ध मामला सामने आते ही उसका सैंपल बेहद सुरक्षित तरीके से तुरंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजा जाएगा. स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, बदन दर्द, उल्टी-दस्त या शरीर से ब्लीडिंग जैसे खतरनाक लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल को सूचित करें.