National News: भारत की सैन्य तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने बताया कि तीनों सेनाओं के बीच लगातार बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई की जा सके. जनरल द्विवेदी ने यह भी संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां मांग करती हैं तो ऑपरेशन सिंदूर 2.0 जैसी कार्रवाई के लिए भी पूरी तैयारी रखी गई है.
पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख और सख्त हुआ
सेना प्रमुख ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस कड़े सैन्य रुख का प्रदर्शन किया था, वह आज भी बरकरार है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों और भारत विरोधी ताकतों को यह समझ लेना चाहिए कि अब भारत किसी भी उकसावे या खतरे को हल्के में नहीं लेगा. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि मौजूदा स्थिति को अगर कोई कमजोरी या स्थायी शांति समझ रहा है तो यह उसकी बड़ी भूल हो सकती है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
किसी भी आपात स्थिति में साथ मिलकर जवाब देंगी तीनों सेनाएं
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना, वायुसेना और नौसेना मिलकर काम कर रही हैं. तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से और प्रभावी तरीके से जवाब दिया जा सके. उन्होंने कहा कि आज का युद्ध केवल सीमा पर लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, साइबर क्षमता और सूचनाओं की ताकत भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
बदल चुके हैं युद्ध के तरीके, सतर्क रहना जरूरी
सेना प्रमुख के अनुसार वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल गया है. अब हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है और जानकारी का आदान प्रदान बेहद तेजी से होता है. ऐसे माहौल में केवल सेना ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की जागरूकता और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है.
सूचना युद्ध भी बन चुका है बड़ी चुनौती
जनरल द्विवेदी ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर यानी सूचना युद्ध की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज किसी भी संघर्ष में केवल हथियारों की ताकत ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि सही जानकारी, जन समर्थन और राष्ट्रीय एकजुटता भी जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. जब पूरा देश एक लक्ष्य और विश्वास के साथ खड़ा होता है, तब विरोधी ताकतों की रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं.
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान सेना प्रमुख ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और सख्त हो चुकी है. रक्षा विशेषज्ञ भी उनके इस बयान को भारत की मजबूत सैन्य तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश मान रहे हैं.
सैन्य जीवन के 42 साल याद कर कैडेट्स को दिया संदेश
अगले महीने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में पहुंचने जा रहे जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने सैन्य जीवन की यात्रा को भी याद किया. उन्होंने बताया कि करीब 42 वर्ष पहले उन्होंने भी इसी परेड ग्राउंड से अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी. कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सैन्य सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति आजीवन समर्पण का दायित्व है. उन्होंने युवा अधिकारियों को अनुशासन, नेतृत्व और आपसी विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने की सलाह दी.
भविष्य की चुनौतियों के लिए संयुक्त तैयारी पर जोर
सेना प्रमुख ने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी नए सैन्य अभियान की आवश्यकता पड़ती है, तो भारतीय सशस्त्र बल हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
सैनिकों का भरोसा जीतना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने नेतृत्व के महत्व पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि अच्छा नेतृत्व केवल आदेश देने से नहीं बनता, बल्कि अपने सैनिकों का विश्वास जीतने से बनता है. उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि वे ऐसा नेतृत्व विकसित करें कि सैनिक उनका अनुसरण भरोसे और सम्मान के कारण करें. सेना प्रमुख ने भरोसे, टीमवर्क और सामूहिक जिम्मेदारी को सैन्य सफलता की सबसे मजबूत नींव बताया.