India Bloc Meeting 2026: करीब दो साल बाद विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की अहम बैठक दिल्ली में आयोजित हुई. इस बैठक में गठबंधन को फिर से सक्रिय करने और आपसी समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया. साथ ही फैसला लिया गया कि अब हर दो महीने में नियमित बैठक की जाएगी. संसद के मानसून सत्र के दौरान भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अध्यक्षता में रोजाना विपक्षी दलों की बैठक होगी.
दो साल में बदले राजनीतिक समीकरण, घटी सहयोगी दलों की संख्या
पांच जून 2024 को हुई पिछली बैठक में 25 क्षेत्रीय दल शामिल हुए थे, लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 23 रह गई. उस समय पांच गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बैठक का हिस्सा थे, जबकि इस बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अकेले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री के रूप में मौजूद रहे.
राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलाव के कारण कई दलों की स्थिति पहले जैसी नहीं रही है. ऐसे में गठबंधन को फिर से मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं.
बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति
बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया गया. इसके अलावा निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर भी सहमति बनी.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही. विपक्षी दलों ने संसद सत्र के दौरान समन्वित रणनीति अपनाने का निर्णय लिया.
राहुल गांधी की भूमिका और मजबूत होने के संकेत
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के सांसद हर सुबह राहुल गांधी के साथ बैठक करेंगे. राजनीतिक जानकार इसे राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं.
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इससे संयुक्त विपक्ष के बीच राहुल गांधी की स्वीकार्यता और बढ़ सकती है.
ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात भी रही चर्चा में
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात और दोनों नेताओं का एक दूसरे से गर्मजोशी से मिलना भी चर्चा का विषय बना रहा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्रीय दलों को विपक्षी एकजुटता की जरूरत पहले से अधिक महसूस हो रही है.
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से प्रतिनिधित्व नहीं होना चिंता का विषय
विश्लेषकों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस बैठक में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से प्रभावी प्रतिनिधित्व देखने को नहीं मिला. माना जा रहा है कि दक्षिण भारत के इन राज्यों में मजबूत राजनीतिक उपस्थिति के बिना गठबंधन के लिए चुनौती बढ़ सकती है.
कौन कौन नेता बैठक में शामिल हुए
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिवसेना उद्धव गुट के उद्धव ठाकरे, एनसीपी शरद गुट के शरद पवार और अन्य सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए.
कौन से बड़े चेहरे बैठक से दूर रहे
इस बैठक में तमिलनाडु की डीएमके का प्रतिनिधित्व नहीं दिखा. अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बने. आंध्र प्रदेश और असम से भी कोई प्रभावी प्रतिनिधित्व सामने नहीं आया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में सहयोगी दलों की कमी इंडिया गठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है.