सजा और मुआवजे के आदेश को अपीलीय अदालत ने किया रद्द
इस मामले में निचली अदालत ने सुनवाई के बाद राधेश्याम यादव को दोषी ठहराया था. अदालत ने उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और शिकायतकर्ता को 3.5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी की ओर से अपील दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने राहत प्रदान की.
साल 2019 में दर्ज हुआ था चेक बाउंस का मामला
मामला वर्ष 2019 का है. शिकायतकर्ता सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि राधेश्याम यादव ने उनसे मित्रवत संबंधों के आधार पर तीन लाख रुपये का ऋण लिया था. आरोप के मुताबिक राशि लौटाने के लिए आरोपी ने तीन अलग अलग चेक दिए थे.
हालांकि जब इन चेकों को बैंक में जमा कराया गया तो सभी चेक पेमेंट स्टॉप्ड बाय ड्रॉअर के कारण अनादृत हो गए. इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया.
अपील में आरोपी ने रखी अपनी दलील
अपील की सुनवाई के दौरान राधेश्याम यादव की ओर से कहा गया कि संबंधित चेक उन्होंने भूमि क्रय विक्रय से जुड़े एक सौदे के सिलसिले में कुछ अन्य लोगों को दिए थे. बाद में इन चेकों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया. आरोपी ने यह भी कहा कि उनका शिकायतकर्ता के प्रति कोई वैध वित्तीय दायित्व नहीं था.
अदालत को शिकायतकर्ता के दावे पर हुआ संदेह
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने से पहले ही आरोपी ने संबंधित बैंकों को भुगतान रोकने का निर्देश दे दिया था. इस परिस्थिति ने शिकायतकर्ता के दावे पर संदेह पैदा किया.
अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित चेक किसी वैध और कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किए गए थे. ऐसे में आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखने का आधार नहीं बनता.
पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी को किया गया बरी
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और मुआवजे के आदेश को निरस्त कर दिया. इसके साथ ही राधेश्याम यादव को चेक बाउंस मामले में बरी कर दिया गया.
करीब सात साल पुराने इस मामले में अपीलीय अदालत के फैसले ने राधेश्याम यादव को बड़ी राहत दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के लिए यह साबित होना जरूरी है कि संबंधित चेक किसी वैध और कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए जारी किए गए थे. पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया.