Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट से कुख्यात अपराधी अमन श्रीवास्तव को बड़ी राहत मिली है। रंगदारी से जुड़े एक मामले में अदालत ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसी मामले में सह-आरोपी विकास तिवारी को भी जमानत प्रदान की गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को निर्धारित शर्तों के तहत रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
एटीएस ने की थी गिरफ्तारी, रंगदारी मांगने का आरोप
मामला व्यवसायियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूली से जुड़ा बताया जाता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अमन श्रीवास्तव और उसके सहयोगी संगठित गिरोह के माध्यम से लोगों को धमकाकर रंगदारी की मांग करते थे। इस मामले की जांच झारखंड एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) द्वारा की गई थी और जांच के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
बचाव पक्ष ने अदालत में रखे कई तर्क, अदालत ने शर्तों के साथ दी जमानत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई में समय लग रहा है। यह भी कहा गया कि आरोपों के समर्थन में प्रत्यक्ष साक्ष्य सीमित हैं तथा ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने अदालत से जमानत देने की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अमन श्रीवास्तव और विकास तिवारी को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। उन्हें सुनवाई के दौरान अदालत में नियमित रूप से उपस्थित रहना होगा और किसी भी प्रकार से जांच या गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना होगा।
कई गंभीर मामलों में आरोपी है अमन श्रीवास्तव
अमन श्रीवास्तव का नाम झारखंड के चर्चित अपराधियों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियां लंबे समय से उसके नेटवर्क पर कार्रवाई करती रही हैं। हालांकि इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी एक मामले में जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी अन्य मामलों से मुक्त हो गया है। यदि उसके खिलाफ अन्य मामलों में वारंट, गिरफ्तारी आदेश या न्यायिक प्रक्रिया लंबित है, तो संबंधित एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में दोनों आरोपियों को राहत मिली है, जबकि अन्य मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में जारी रहेगी।