Jharkhand News: झारखंड सरकार ने चंदनकियारी स्थित पर्वतपुर कोल ब्लॉक और सीतानाला कोल ब्लॉक के खनन पट्टे को मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले के बाद लंबे समय से अटकी दोनों परियोजनाओं के शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. खनन गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद से स्थानीय लोगों, युवाओं और व्यापारियों में नई उम्मीद जगी है.
दोनों कोल ब्लॉक वर्ष 2023 में नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से JSW स्टील को आवंटित किए गए थे. हालांकि खनन पट्टा और जरूरी स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अब तक उत्पादन शुरू नहीं हो सका था. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही खनन कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.
चंदनकियारी के विधायक उमाकांत रजक ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया. उन्होंने कहा कि कोयला उत्पादन शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय चंदनकियारी के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा.
रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार की मंजूरी के बाद पर्वतपुर कोल ब्लॉक के करीब 2174.52 एकड़ और सीतानाला कोल ब्लॉक के लगभग 792 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू हो सकेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे.
खनन शुरू होने के बाद परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, होटल, छोटे व्यापार और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ेंगी. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से फाइलों में अटकी परियोजनाएं अब जमीन पर उतरेंगी और बोकारो-धनबाद कोल बेल्ट को नई औद्योगिक पहचान मिलेगी.
पर्वतपुर कोल ब्लॉक का रहा लंबा इंतजार
पर्वतपुर कोल ब्लॉक का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड को देने की प्रक्रिया शुरू की थी. उस समय अनुमान लगाया गया था कि खदान शुरू होने से करीब चार हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है.
करीब नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस कोल ब्लॉक को भूमिगत खनन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी, ताकि आसपास के गांवों पर कम से कम प्रभाव पड़े. लेकिन आवंटन नीति, कानूनी प्रक्रिया और स्वामित्व हस्तांतरण जैसी वजहों से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी.
पहले इसका संचालन सेल के पास रहा, बाद में यह बीसीसीएल के अधीन आया और फिर 2023 में JSW स्टील ने नीलामी के जरिए इसे हासिल किया.
दुगदा वाशरी को मिलेगा कच्चा कोयला, बढ़ेगी औद्योगिक गतिविधि
सरकार की मंजूरी के बाद JSW स्टील की पर्वतपुर और सीतानाला कोकिंग कोल परियोजनाओं से निकलने वाले कोयले का इस्तेमाल दुगदा कोल वाशरी में किया जाएगा. इससे बंद पड़ी दुगदा वाशरी के दोबारा संचालन की उम्मीद भी बढ़ गई है.
जानकारी के अनुसार पांच साल से अधिक समय से बंद दुगदा वाशरी को फिर से चालू करने की तैयारी चल रही है. कंपनी वाशरी की मशीनरी और आधारभूत संरचना का आकलन कर रही है. वर्तमान में इसकी क्षमता करीब दो मिलियन टन वाश्ड कोल उत्पादन की है, जिसे भविष्य में चार मिलियन टन तक बढ़ाने की योजना है.
पर्वतपुर और सीतानाला से मिलने वाला कच्चा कोयला वाशरी के लिए नियमित सप्लाई का आधार बनेगा. इससे उत्पादन प्रक्रिया बेहतर होगी और इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण वाश्ड कोकिंग कोल उपलब्ध हो सकेगा.
औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, खदान और वाशरी दोनों की जिम्मेदारी एक ही कंपनी के पास होने से उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी. इससे बोकारो-धनबाद क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.