Ranchi News : झारखंड सरकार ने कल्याण सेवा अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए नई प्रशिक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब अधिकारियों को सेवा के प्रत्येक चरण में अनिवार्य प्रशिक्षण से गुजरना होगा। नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्रशासन और नेतृत्व विकास जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
नई नीति के तहत अधिकारियों को नियुक्ति के समय, सेवाकाल के दौरान और पदोन्नति के बाद तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बदलती प्रशासनिक चुनौतियों और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।
8 सप्ताह का आधारभूत प्रशिक्षण, जिला स्तर पर मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
नियुक्ति के बाद सभी अधिकारियों के लिए आठ सप्ताह का आधारभूत प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। पहले सप्ताह में विभागीय कार्यप्रणाली, योजनाओं, संगठनात्मक ढांचे, कंप्यूटर संचालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद पांच सप्ताह तक जिला स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण कराया जाएगा। इस दौरान अधिकारी जिला कल्याण पदाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्य करते हुए योजनाओं के निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का अनुभव प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके कार्य का मूल्यांकन भी किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया तो उसे दो सप्ताह का अतिरिक्त प्रशिक्षण लेना होगा।
ई-गवर्नेंस, नेतृत्व विकास और सुशासन पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के अंतिम चरण में दो सप्ताह का संस्थागत प्रशिक्षण होगा, जिसमें ऑफिस मैनेजमेंट, ई-गवर्नेंस, नेतृत्व क्षमता और सरकारी नियमों से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे।
नई नीति के तहत अधिकारियों को हर 6 से 8 वर्ष के अंतराल पर दो सप्ताह का सेवाकालीन प्रशिक्षण भी लेना अनिवार्य होगा। इसमें ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, ई-ऑफिस, समस्या समाधान और कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल रहेंगे, ताकि अधिकारी बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को अपडेट रख सकें।
पदोन्नति के बाद भी मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, 90% उपस्थिति अनिवार्य
सरकार ने पदोन्नति के बाद भी अधिकारियों के लिए 3 से 5 दिन का विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। इसमें नई जिम्मेदारियों के निर्वहन, नेतृत्व विकास, तनाव प्रबंधन, नैतिक प्रशासन और सुशासन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विभाग ने सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की है। सरकार का कहना है कि नई प्रशिक्षण व्यवस्था का उद्देश्य कल्याण सेवा अधिकारियों को तकनीक-सक्षम, दक्ष और जवाबदेह प्रशासनिक अधिकारी के रूप में विकसित करना है, जिससे सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और जनसेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।