MGM Hospital Jamshedpur: एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद मंगलवार रात अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई. गुस्साए परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक समझाने के बाद मामला शांत कराया.
मृतक की पहचान ओल्ड सीतारामडेरा निवासी कानू चक्रवर्ती (61) के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, वह लंबे समय से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. पहले निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उनकी तबीयत में सुधार हुआ था. बाद में लीवर में दोबारा परेशानी बढ़ने पर उन्हें एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
परिवार का कहना है कि शुक्रवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें इमरजेंसी वार्ड लाया गया, जहां से मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रहा था.
मृतक की बेटी सिंजा चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि भर्ती के बाद मरीज की सही तरीके से देखभाल नहीं हुई. उनका कहना है कि कई बार डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को बुलाया गया, लेकिन समय पर कोई नहीं पहुंचा. परिवार का आरोप है कि इलाज में देरी के कारण मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई.
मंगलवार रात करीब 10 बजे कानू चक्रवर्ती ने दम तोड़ दिया. मौत की खबर मिलते ही परिजन भड़क उठे और अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में विरोध शुरू कर दिया. उन्होंने अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और लिखित जवाब की मांग की.
स्थिति बिगड़ने की सूचना पर एमजीएम थाना और पीसीआर की टीम अस्पताल पहुंची. पुलिस ने परिजनों से बातचीत की और काफी मशक्कत के बाद माहौल को शांत कराया.
दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मरीज की स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक थी. चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने और आईसीयू में शिफ्ट करने की सलाह दी थी, लेकिन परिजन आर्थिक कारणों से मरीज का इलाज एमजीएम में ही कराना चाहते थे.
हालांकि परिजन इस दावे से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि यदि समय रहते मरीज को बेहतर इलाज और आवश्यक सुविधाएं मिल जातीं तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है.