परिषद के सदस्यों ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस मैच का पूरी तरह से बायकॉट करें और टीवी पर मैच न देखें। पूर्व सैनिकों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद ने कई परिवारों को उजाड़ा है और ऐसे देश के साथ मैच देखना शहीदों का अपमान होगा।
अध्यक्ष विनय कुमार यादव ने इस संबंध में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, "पाकिस्तान के भेजे आतंकियों ने कितनी ही महिलाओं का सिंदूर मिटाकर उनका सुहाग उजाड़ा है।
ऐसे में उस देश के साथ क्रिकेट का मैच देखना हमारे शहीदों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनहीनता होगी।" उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद देश भर में इस मैच को लेकर भावनाएं आहत हुई हैं और लोग इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर 101% इस मैच का बहिष्कार करेगी।
महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह ने की विचार का समर्थन
महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट न खेले। जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक ऐसे मैच संबंधों को सामान्य दिखाने का एक झूठा प्रयास मात्र हैं।" उन्होंने आगे कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखने की बात अक्सर कही जाती है, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और हमारे सैनिकों के बलिदान की हो, तो कोई भी चीज उससे बढ़कर नहीं हो सकती।
परिषद के अन्य सदस्य भी रहे शामिल
परिषद के अन्य सदस्य सुखविंदर सिंह, अमरेंद्र शर्मा, निर्मल कुमार, सत्य प्रकाश, कृष्ण मोहन सिंह, संतोष कुमार सिंह और निरंजन शर्मा ने भी इस बायकॉट का समर्थन किया।
राष्ट्रभक्ति की भावना का दिशा
सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा कि देश के लिए हमारे सैनिकों ने जो बलिदान दिया है, उसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। टीवी बंद रखकर इस मैच का बहिष्कार करना उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अपील से यह स्पष्ट है कि पहलगाम हमले की घटना ने लोगों के मन में पाकिस्तान के प्रति गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसकी अभिव्यक्ति अब इस क्रिकेट मैच के विरोध में हो रही है।