Jamshedpur: शहर में अपराधियों ने अब पिस्तौल की जगह चापड़ को हथियार बना लिया है। एक माह में चापड़ से हमले और हत्या के 15 से अधिक मामले सामने आए हैं। खास बात यह है कि इस हथियार के इस्तेमाल पर आर्म्स एक्ट की धारा नहीं लगती, जिससे आरोपी आसानी से बच निकलते हैं। अब पुलिस के लिए यह नई चुनौती बनती जा रही है।
शहर के सोनारी, जुगसलाई और गोलमुरी थाना क्षेत्र में चापड़ से हमले के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। इन इलाकों में आपसी रंजिश और पुराने विवाद में अक्सर अपराधी चापड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकांश मामलों में हमलावरों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होता। इसलिए गिरफ्तारी के बाद वे जल्द ही जमानत पर बाहर आ जाते हैं और दोबारा घटना को अंजाम देते हैं।
चापड़ या धारदार हथियार को घरेलू उपयोग का सामान बताया जाता है, इसलिए इसे अवैध हथियार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। यही वजह है कि अपराधी इसे सुरक्षित हथियार मानकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार घटनास्थल से हथियार बरामद भी नहीं हो पाता, जिससे केस कमजोर पड़ जाता है।
अपराधियों द्वारा चापड़ के इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ने से कानून-व्यवस्था पर असर दिखने लगा है। सिर्फ पिछले महीने ही एक हत्या, पांच गंभीर घायल करने और कई झगड़ों में इस हथियार का उपयोग हुआ। गोलमुरी क्षेत्र में एक युवक की गर्दन पर चापड़ से वार कर हत्या कर दी गई थी, जबकि गोलमुरी में वसूली विवाद में तीन युवकों को चापड़ से घायल किया गया था।