Simdega News: सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के निमतुर गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया. छठ पर्व की तैयारियों के बीच गांव के तालाब में नहाने गई तीन मासूम बच्चियों की डूबने से मौत हो गई. इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया. उस दिन जिला छठ महापर्व के उत्साह में डूबा था, लेकिन इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया. जानकारी के मुताबिक, बच्चियों के परिजन उस समय घर पर नहीं थे. इसी बीच गांव की तीन बच्चियां, खुशबू कुमारी (6 वर्ष), प्रमिका कुमारी (5 वर्ष) और सीमा कुमारी (7 वर्ष), तालाब में नहाने चली गईं.
शाम को जब परिजन घर लौटे तो बच्चियों का कोई पता नहीं चला. परेशान परिजनों ने आसपास के लोगों के साथ मिलकर उनकी तलाश शुरू की. खोजबीन के दौरान एक बच्ची तालाब में तैरती दिखी. परिजनों ने तुरंत तालाब से तीनों बच्चियों को बाहर निकाला और उन्हें बानो के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना देर रात अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी. पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में ले लिया है और सोमवार को पोस्टमार्टम के लिए सिमडेगा सदर अस्पताल भेजने की तैयारी है.
यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता की कमी को उजागर करता है. तालाब और नदियों जैसे जलाशयों के पास बच्चों की निगरानी का अभाव इस तरह की त्रासदियों का कारण बनता है. खासकर त्योहारों के समय, जब परिवार व्यस्त रहते हैं, बच्चों पर ध्यान देना और मुश्किल हो जाता है. इस घटना में परिजनों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया. ग्रामीण इलाकों में जलाशयों के आसपास सुरक्षा उपायों, जैसे कि बाड़ लगाने या चेतावनी बोर्ड लगाने की जरूरत है. साथ ही, बच्चों को पानी के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों और समुदायों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए. पुलिस और स्थानीय प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है. यह हादसा समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर जिम्मेदारी और सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है.