Jharkhand Weather Updates: झारखंड में मौसम ने करवट ले ली है और अब ठंड ने आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है. मौसम विभाग ने राज्य में 10 और 11 नवंबर को शीत लहर चलने का अलर्ट जारी किया है. विभाग के अनुसार इन दो दिनों में राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है. साथ ही लोगों को ठंड के बढ़ते असर से सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिणी झारखंड के रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी और रामगढ़ जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी. वहीं उत्तर-पश्चिमी झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा और सरायकेला-खरसावां जिलों में भी ठंडी हवाएं तेज चलेंगी. पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा में भी ठंड का असर अधिक रहने की संभावना है.
इसके अलावा उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामतारा, पाकुर और साहेबगंज जिलों में भी शीत लहर का प्रभाव महसूस किया जा सकता है. विशेष रूप से पलामू, गढ़वा, चतरा, गुमला, लातेहार और लोहरदगा जिलों में शीत लहर की स्थिति बनने की चेतावनी दी गई है.
मौसम विभाग ने बताया कि लंबे समय तक ठंड में रहने से फ्लू, बहती या बंद नाक और नाक से खून आने जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. विभाग ने कहा है कि कंपकंपी को हल्के में न लें, क्योंकि यह शरीर से गर्मी कम होने का संकेत है. जितना संभव हो, लोग घर के अंदर रहें और खुद को गर्म कपड़ों से ढककर रखें.
विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के अधिक समय तक संपर्क में रहने से शीतदंश यानी फ्रॉस्टबाइट की स्थिति बन सकती है. इस दौरान त्वचा पीली और कठोर हो जाती है और बाद में उस पर काले छाले पड़ सकते हैं. गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सीय मदद लेनी चाहिए.
शीत लहर का असर कृषि, जल आपूर्ति, परिवहन और बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है. गेहूं, आलू और सरसों जैसी रबी फसलों को नुकसान का खतरा है.
झारखंड में इस बार ठंड की शुरुआत सामान्य से पहले हो रही है जो संकेत देता है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल राज्य में उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं का असर अधिक रहेगा. ऐसे में लोगों को अभी से गर्म कपड़े, रजाई और कंबल तैयार कर लेने चाहिए. सरकार और प्रशासन को भी जरूरतमंदों के लिए अलाव और राहत केंद्रों की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए ताकि शीत लहर के दौरान कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे ठंड से पीड़ित न हो.