भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना
करात ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा का “हस्तक्षेपकारी और विभाजनकारी रवैया” स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि झारखंड में भाजपा की रणनीति विफल हुई है और उसने राज्य में अपनी सीटें खो दी हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग पर खुलकर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए कई विभाजनकारी भाषण दिए, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। करात ने आरोप लगाया कि मतदान से ठीक एक दिन पहले मतदाताओं के बैंक खातों में ₹10,000 भेजे गए, जो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, चुनाव आयोग अब चुनाव आयोग नहीं, भाजपा आयोग की तरह काम कर रहा है। सीपीआईएम नेता ने झारखंड की झामुमो सरकार से सभी दलों को साथ लेकर बैठक करने और राज्य में वैकल्पिक नीतियों को मजबूती से लागू करने का आग्रह किया, ताकि भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को विफल किया जा सके।
रैयतों की जमीन और कोल इंडिया पर खुलेआम लूट का आरोप
वृंदा करात ने झारखंड में रैयतों की जमीन की गलत मापी और अपर्याप्त भुगतान से जुड़ी शिकायतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोल इंडिया पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कंपनी निजी कंपनियों को खदानें सौंपकर “खुलेआम लूट” करवा रही है। उन्होंने कोयला खनन से बढ़ रहे प्रदूषण पर भी चिंता जताई, जिससे स्थानीय जनता को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीपीआईएम करेगी व्यापक आंदोलन इन सभी मुद्दों को लेकर, वृंदा करात ने घोषणा की है कि सीपीआईएम जल्द ही जिला स्तर पर एक व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के हक और संसाधनों की लड़ाई को सड़क तक ले जाएगी।