Political News: बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट की बैठक के बाद राजभवन पहुंचे और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को विधानसभा भंग करने का पत्र सौंपा. एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को गांधी मैदान में प्रस्तावित है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे. ऐसे में बुधवार को एनडीए विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगना तय माना जा रहा है. इसके साथ ही नई कैबिनेट में कौन शामिल होगा इसे लेकर सियासी चर्चा चरम पर है.
नीतीश कैबिनेट के 29 में से 28 मंत्री इस बार चुनाव जीतकर लौटे हैं. जेडीयू के 12 मंत्रियों में केवल सुमित कुमार हार गए हैं, जबकि बाकी सभी को जीत मिली है. बीजेपी कोटे के सभी मौजूदा मंत्री भी विजयी रहे हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नीतीश पुरानी टीम पर भरोसा बनाए रखेंगे या फिर नई ऊर्जा और नए समीकरण जोड़ते हुए कैबिनेट में बदलाव करेंगे.
मंत्रिमंडल गठन का संभावित फॉर्मूला
एनडीए में छह विधायकों पर एक मंत्री बनाए जाने के फॉर्मूले की चर्चा तेज है. इस आधार पर जेडीयू को 15 से 16 मंत्री पद मिल सकते हैं जबकि बीजेपी को भी लगभग इतने ही पद मिलेंगे. चिराग पासवान की एलजेपी आर को दो से तीन पद और जीतनराम मांझी तथा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को एक एक पद मिलने की संभावना है.
जेडीयू नेताओं ललन सिंह और संजय झा दिल्ली पहुंच चुके हैं जहां बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभागों और मंत्रियों के वितरण पर बातचीत चल रही है. इसी बैठक के बाद कैबिनेट गठन का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा.
जेडीयू से कौन बन सकता है मंत्री
जेडीयू के पुराने चेहरों में विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी और महेश्वर हजारी ऐसे नेता हैं जो वर्षों से नीतीश की टीम का हिस्सा रहे हैं. इनके दोबारा मंत्री बनाए जाने की संभावना मजबूत है. जमा खान जेडीयू के इकलौते मुस्लिम विधायक हैं, इसलिए उनका नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. विधान परिषद के सदस्य अशोक चौधरी भी चर्चाओं में हैं.
नए चेहरों में जयंत राज, संतोष निराला, शालिनी मिश्रा, उमेश कुशवाहा, भुलो मंडल और मंजीत सिंह के नाम लिए जा रहे हैं. हालांकि संकेत यही है कि जेडीयू इस बार भी बड़े फेरबदल के मूड में नहीं है.
बीजेपी की सूची में कौन
बीजेपी कोटे के सभी मंत्री इस बार जीतकर लौटे हैं. इनमें सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, प्रेम कुमार, रेणु देवी, मंगल पांडेय, नीरज कुमार सिंह, नितिन नवीन, जिवेश कुमार, कृष्णनंदन पासवान और कई अन्य नाम शामिल हैं. हालांकि बीजेपी पिछले कार्यकाल में चेहरों में बड़ा बदलाव करने के लिए जानी जाती है. 2020 में बनाए गए दो डिप्टी सीएम को 2024 की कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी. इस बार भी पार्टी कुछ पुराने चेहरों को हटाकर नए नेताओं को मौका दे सकती है.
एलजेपी आर, हम और आरएलजेपी कोटा
चिराग पासवान की पार्टी को तीन मंत्री पद मिलने का अनुमान है. उनके करीबी और एलजेपी आर के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी लगभग तय माने जा रहे हैं. चिराग दो अन्य विधायकों को भी मंत्री बना सकते हैं. मांझी कैंप से उनके बेटे संतोष मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से उनकी पत्नी स्नेहलता के नाम की चर्चा है.
सोशल इंजीनियरिंग होगी केंद्र में
एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत को देखते हुए कैबिनेट में जातीय संतुलन सबसे महत्वपूर्ण कारक रहेगा. जेडीयू अपने हिस्से में ओबीसी और अति पिछड़े वर्ग को तवज्जो देगा जबकि बीजेपी अगड़ी जातियों और ओबीसी दोनों को साधने की कोशिश करेगी. एलजेपी आर, हम और आरएलजेपी के माध्यम से दलित और महादलित प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाएगा.
नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक शैली में स्थिरता को प्राथमिकता देते रहे हैं. ऐसे में संभावना है कि वह अपनी टीम के बड़े हिस्से को बरकरार रखेंगे. हालांकि एनडीए में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और जातीय समीकरणों को देखते हुए कुछ नए चेहरों के जरिए संतुलन बनाने की भी कोशिश होगी. बीजेपी अपनी आंतरिक राजनीति के अनुसार बदलाव कर सकती है. कुल मिलाकर कैबिनेट गठन में अनुभव, जातीय संतुलन और गठबंधन धर्म तीनों बराबर महत्व रखते नजर आएंगे. यह भी साफ है कि नई सरकार की पहली छवि इसी कैबिनेट से तय होगी और उसी पर आने वाले पांच वर्षों में एनडीए के प्रदर्शन की दिशा निर्भर करेगी.