Ahmedabad: अहमदाबाद स्थित विशेष PMLA अदालत ने पूर्व IAS अधिकारी प्रदीप निरंकरणाथ शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग के एक पुराने मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने 6 दिसंबर 2025 को दिए अपने फैसले में उन्हें पांच वर्ष की कठोर कैद और 50 हजार रुपये के आर्थिक दंड की सज़ा सुनाई है। साथ ही उनकी वह संपत्ति भी स्थायी रूप से सरकार के नाम करने का आदेश दिया गया है, जिसे जांच एजेंसियों ने अवैध कमाई से जुड़ा माना था।
मामला क्या था?
प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच गुजरात में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की थी। आरोपों के अनुसार भुज (कच्छ) के कलेक्टर रहते हुए प्रदीप शर्मा पर यह आरोप लगा कि उन्होंने सरकारी भूमि को नियमों के विपरीत और बाज़ार मूल्य से काफी कम दर पर आवंटित किया। इस कथित कार्रवाई से राज्य सरकार को लगभग 1.20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि शर्मा को आर्थिक लाभ पहुंचा।
अदालत ने कड़ी सज़ा क्यों दी?
इस केस में शर्मा की डिस्चार्ज याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अपील को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी भी की थी कि मनी लॉन्ड्रिंग एक सतत अपराध है, इसलिए इसमें शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई ज़रूरी है।
इसी कड़ी में विशेष अदालत ने न केवल सज़ा सुनाई बल्कि ED द्वारा अटैच की गई 1.32 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त रखने का आदेश भी पारित किया।
सज़ा अलग से काटने का निर्देश
प्रदीप शर्मा ने यह दलील भी दी थी कि उन्हें दी गई यह नई सज़ा उनकी पहले की सज़ा के साथ-साथ ही चले, लेकिन अदालत ने इसे मानने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि एक उच्च प्रशासनिक पद संभालने वाले अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार और धन शोधन में शामिल होना अत्यंत गंभीर अपराध है, इसलिए इस सज़ा को किसी और सज़ा के साथ जोडकर नहीं चलाया जा सकता।