तीसरी बार रहे अनुपस्थित
यह कोई पहली बार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, यह तीसरा अवसर है जब शशि थरूर इस प्रकार की महत्वपूर्ण संसदीय बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। उनकी लगातार गैर-मौजूदगी ने पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
अटकलों का बाजार गर्म
शशि थरूर, जो अपनी मुखरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की समझ के लिए जाने जाते हैं, उनकी यह दूरी सामान्य नहीं मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व की स्वीकार्यता से जुड़ा हो सकता है।
कुछ हलकों में इसे अतीत में सक्रिय रहे G-23 समूह के सदस्यों की बेचैनी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी अनुपस्थिति को उनके गृह राज्य केरल की राजनीति और वहां के पार्टी समीकरणों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
उनकी चुप्पी कांग्रेस के लिए सियासी पहेली बनती जा रही
कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट है कि थरूर की अनुपस्थिति ने पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है और विपक्षी खेमे को कांग्रेस पर निशाना साधने का एक और मौका दे दिया है। थरूर के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। उनकी चुप्पी कांग्रेस के लिए सियासी पहेली बनती जा रही है।