प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को विभिन्न स्रोतों से सूचना मिली थी कि ओलीडीह ओपी प्रभारी द्वारा अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में संलिप्त कुछ युवकों को संदेहास्पद स्थिति में बिना किसी कानूनी कार्रवाई के ओपी से छोड़ दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा पुलिस अधीक्षक, नगर जमशेदपुर को सौंपा गया था।
जांच में क्या सामने आया
जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 10 दिसंबर 2025 की रात लगभग 08:00 बजे, अवैध गांजा खरीद–बिक्री के आरोप में कई पुड़िया गांजा के साथ 04 युवकों को थाना लाया गया था। इनमें से
1. अमन सिंह
2. संतोष ठाकुर
को बिना किसी कानूनी कार्रवाई और बिना वरीय पदाधिकारी को सूचित किए ओपी से छोड़ दिया गया।
इसके अलावा 11 दिसंबर 2025 को साधु मुंडा नामक एक अन्य संदेही को भी इसी तरह बिना प्राथमिकी दर्ज किए छोड़ दिया गया।
वरीय अधिकारियों को किया गुमराह
आयोजित मासिक अपराध गोष्ठी के दौरान जब मादक पदार्थों के विरुद्ध की गई कार्रवाई को लेकर ओलीडीह ओपी प्रभारी से पूछताछ की गई, तो उन्होंने तथ्यों को छिपाते हुए बताया कि केवल दो युवकों को ही पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें अविलंब प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया, लेकिन जांच के समय तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी।
निलंबन का आदेश
पुलिस अधीक्षक, नगर द्वारा समर्पित जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि
वरीय अधिकारियों को गुमराह किया गया
उनके निर्देशों का उल्लंघन हुआ
गंभीर एवं संवेदनशील मादक पदार्थ मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई
कथित रूप से संदेहियों/अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया
इन तथ्यों को देखते हुए दीपक कुमार ठाकुर की सत्यनिष्ठा और आचरण संदिग्ध पाए गए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, जमशेदपुर निर्धारित किया गया है।
नए ओपी प्रभारी की नियुक्ति
पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।