Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2025-12-24

Jharkhand News: रिम्स जमीन घोटाला मामले में हाई कोर्ट सख्त, अवैध आवंटन में शामिल अफसरों पर FIR और मुआवजे का आदेश

Jharkhand News: रांची के रिम्स परिसर में जमीन से जुड़ा बड़ा खेल आखिरकार हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद उजागर हो गया है. झारखंड हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील संस्था की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा और रजिस्ट्री होना सिर्फ गलती नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक अपराध है. कोर्ट ने इस पूरे मामले में अफसरों और बिल्डरों की भूमिका को कटघरे में खड़ा करते हुए सरकार को जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है.

अधिकारियों और बिल्डरों पर कोर्ट सख्त
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की डिवीजन बेंच ने ज्योति शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान साफ किया कि जिन सरकारी अधिकारियों ने रिम्स की जमीन पर कब्जा कराने में भूमिका निभाई है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. कोर्ट ने पुलिस को सीधे तौर पर कार्रवाई का निर्देश दिया है.

बेदखल लोगों को मुआवजा देने का आदेश
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों को इस पूरे प्रकरण में बेवजह परेशान किया गया और बेदखल किया गया, उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए. यह मुआवजा सरकारी अधिकारियों और संबंधित बिल्डरों की ओर से दिया जाएगा. कोर्ट ने माना कि प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा.

रजिस्ट्री और रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर नाराजगी
कोर्ट ने 20 दिसंबर को दिए फैसले में रजिस्ट्री से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई. कहा गया कि जमीन से संबंधित रिकॉर्ड हर समय उपलब्ध थे, इसके बावजूद आंख मूंदकर निजी पक्षों के पक्ष में टाइटल बदले गए. किराया रसीद, राजस्व रिकॉर्ड और गैर देनदारी प्रमाण पत्रों में भी हेरफेर सामने आया है.

रिम्स प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
हाई कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि रिम्स परिसर के भीतर निर्माण कार्य होते रहने के बावजूद अस्पताल प्रशासन लंबे समय तक खामोश रहा. जनहित याचिका वर्ष 2018 में दाखिल हुई थी, लेकिन रिम्स की ओर से कभी यह जानकारी नहीं दी गई कि उसकी जमीन पर कब्जा किया जा चुका है.

जांच में सामने आया सात एकड़ का कब्जा
मामला तब खुलकर सामने आया जब झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव ने कोर्ट के निर्देश पर जांच की. जांच में यह सामने आया कि रिम्स परिसर के भीतर करीब सात एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है. इसके बाद हाई कोर्ट ने तीन दिसंबर को जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया.

प्रशासन ने गिराई अवैध इमारतें
कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और रिम्स की जमीन पर बनी इमारतों को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई. कोर्ट ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड होते हुए भी कोई अधिकारी सामने नहीं आया, जो इस गड़बड़ी को समय रहते रोकता.

अगली सुनवाई 6 जनवरी को
हाई कोर्ट ने साफ किया है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय किए बिना वह पीछे हटने वाला नहीं है. प्रकरण की अगली सुनवाई छह जनवरी 2026 को होगी.

सिस्टम की सड़ांध उजागर
रिम्स जमीन घोटाला सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि सिस्टम की सड़ांध को उजागर करता है. जिस अस्पताल पर राज्य की सबसे बड़ी स्वास्थ्य जिम्मेदारी है, उसी की जमीन को अफसरों और बिल्डरों ने मिलकर बेच डाला. यह मामला बताता है कि जब तक प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे घोटाले बार बार होते रहेंगे. हाई कोर्ट का सख्त रुख एक मिसाल है, लेकिन असली परीक्षा सरकार और जांच एजेंसियों की है कि क्या वे दोषियों को सजा तक पहुंचा पाते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !