Jharkhand News: हजारीबाग जिले के केरेडारी ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर कोयला ढुलाई को लेकर जारी गतिरोध समाप्त हो गया. पुलिस ने मौके पर मौजूद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को सड़क से हटाया, जिसके बाद इस मार्ग से कोयले का परिवहन फिर से शुरू हो सका.
मार्ग पर कोयला परिवहन हो गया था पूरी तरह ठप
जानकारी के अनुसार एक जनवरी को अवकाश के कारण कोयला ढुलाई बंद थी. इसी दौरान ट्रांसपोर्टिंग रूट पर अवैध रूप से एक दीवार खड़ी कर दी गई, जिससे दो जनवरी की सुबह से ही इस मार्ग पर कोयला परिवहन पूरी तरह ठप हो गया था. जब प्रशासन ने सड़क पर बनी दीवार को हटाकर ढुलाई शुरू कराने की कोशिश की, तो पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने इसका विरोध किया और दीवार के पास कुर्सी लगाकर बैठ गए. इसके कारण दीवार तोड़ने का काम रुक गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई.
शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची
एनटीपीसी के कोयले की ढुलाई बाधित होने और दीवार खड़ी किए जाने की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने पहले पूर्व मंत्री को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया. इसके बाद सड़क से अवरोध हटाया गया और कोयला ढुलाई दोबारा शुरू कर दी गई.
बताया जाता है कि एनटीपीसी के कोयला खदानों से निकाले गए कोयले की ढुलाई के लिए बीआरजी कंपनी इस मार्ग का उपयोग करती है. इस कंपनी को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के साथ लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. सड़क पर दीवार खड़ी कर ढुलाई रोकने की कोशिश को भी इसी पुराने विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है.
कोयला खनन और परिवहन को लेकर चल रहे पुराने टकराव की गहराई उजागर
केरेडारी मार्ग पर हुई यह घटना एक बार फिर कोयला परिवहन से जुड़े विवादों और स्थानीय विरोध की तस्वीर सामने लाती है. अवैध निर्माण और ढुलाई में बाधा से न केवल सरकारी परियोजनाएं प्रभावित होती हैं बल्कि कानून व्यवस्था की चुनौती भी खड़ी होती है. प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति भले ही सामान्य हो गई हो, लेकिन यह मामला क्षेत्र में कोयला खनन और परिवहन को लेकर चल रहे पुराने टकराव की गहराई को भी उजागर करता है