Jamshedpur: एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी 23 वर्षीय युवक जीत महतो की मौत के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। इस प्रकरण को लेकर लगातार बढ़ते दबाव और राजनीतिक बयानबाजी के बीच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष पांडेय ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखते हुए न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच आवश्यक हो गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेरेब्रल मलेरिया से मौत की पुष्टि
जीत महतो के शव का पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सामने आ चुका है। रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत सेरेबल मलेरिया के कारण हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट, मारपीट या हिंसा के निशान नहीं पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सेरेब्रल मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जिसमें मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
चोरी का मोबाइल रखने के आरोप में हुई थी हिरासत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जीत महतो को चोरी के एक मोबाइल फोन को अपने पास रखने के आरोप में 28 दिसंबर को हिरासत में लिया गया था। हिरासत के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद 29 दिसंबर को उसे इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और 31 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।
राजनीतिक हस्तियों का दौरा, जांच की मांग तेज
घटना के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ने लगा। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पश्चिमी विधायक सरयू राय और जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो मृतक जीत महतो के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए संदेह भी जताया है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
घटना के समय थाना प्रभारी ड्यूटी पर नहीं थे मौजूद
इस पूरे प्रकरण को लेकर एमजीएम थाना प्रभारी सचिन दास ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि जिस अवधि में जीत महतो को हिरासत में लिया गया और उसकी तबीयत बिगड़ी, उस समय वे राष्ट्रपति की ड्यूटी में तैनात थे। उनकी ड्यूटी स्टेशन क्षेत्र के संकटा सिंह पेट्रोल पंप के पास 28 और 29 दिसंबर को लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि वे 30 दिसंबर की सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच थाना ज्वाइन कर पाए थे, तब तक जीत महतो अस्पताल में इलाजरत था। थाना प्रभारी का कहना है कि हिरासत की कार्रवाई उनके मौजूद न रहने के दौरान हुई थी।
न्यायिक जांच से सामने आएगी सच्चाई
अब एसएसपी द्वारा न्यायिक जांच की मांग किए जाने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जीत महतो की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या दोष है या नहीं।