Ranchi: राजधानी रांची में खाद्य सुरक्षा की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। शहर की बढ़ती आबादी और तेजी से खुल रहे फूड स्टॉल्स के बीच पूरे जिले की जिम्मेदारी केवल एक फूड सेफ्टी अधिकारी के कंधों पर है। ऐसे में नियमित जांच और निगरानी संभव नहीं हो पा रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
शहर में हर दिन दर्जनों नए खाने-पीने के स्टॉल खुल रहे हैं। इनमें से कई जगहों पर साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता। न तो रसोई की स्वच्छता की निगरानी हो रही है और न ही इस्तेमाल हो रहे कच्चे माल की गुणवत्ता की जांच। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
त्योहारों तक सीमित रह जाती है कार्रवाई
फूड सेफ्टी विभाग की सक्रियता ज्यादातर त्योहारों के समय ही नजर आती है। उस दौरान खोवा, पनीर और मिठाइयों के सैंपल लेकर जांच अभियान चलाया जाता है। लेकिन बाकी दिनों में बाजार की नियमित मॉनिटरिंग लगभग नहीं के बराबर होती है।
स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और छोटे ठेलों की जांच तो और भी कम होती है। जबकि इन स्थानों पर रोज बड़ी संख्या में लोग खाना खाते हैं। शिकायतें मिलने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।
लाइसेंस जांच में ढिलाई, बढ़ रही अव्यवस्था
शहर में खाद्य व्यवसाय से जुड़े प्रतिष्ठानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके लाइसेंस और गुणवत्ता की जांच व्यवस्थित ढंग से नहीं हो पा रही। कई दुकानों में बिना वैध लाइसेंस के कारोबार चलने की आशंका है।
नियमित निरीक्षण के अभाव में उपभोक्ताओं तक मिलावटी या एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि विभाग को सालभर सघन जांच अभियान चलाने की जरूरत है, न कि केवल विशेष मौकों पर।
मिठाई दुकानों में नियमों की अनदेखी
कुछ वर्ष पहले प्रशासन द्वारा मिठाई दुकानों में सख्त अभियान चलाया गया था। दुकानदारों को निर्देश दिए गए थे कि वे मिठाइयों की निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि (शेल्फ लाइफ) स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
लेकिन वर्तमान में अधिकांश दुकानों में यह नियम लागू नहीं दिख रहा। मिठाइयों के बारे में जरूरी जानकारी डिस्प्ले नहीं की जा रही, जिससे उपभोक्ताओं को यह पता ही नहीं चलता कि वे कितने दिन पुरानी मिठाई खरीद रहे हैं। ऐसे में कई दिनों पुरानी मिठाइयों की बिक्री की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
“अकेले पूरे शहर को कवर करना मुश्किल” – डॉ. पवन कुमार
डिस्ट्रिक्ट फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. पवन कुमार का कहना है कि वर्तमान में वे अकेले ही पूरे जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाता है, खासकर त्योहारों के दौरान ज्यादा खपत वाली वस्तुओं की जांच पर फोकस रहता है।
हालांकि उनका मानना है कि अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाए तो नियमित और व्यापक अभियान चलाना संभव हो सकेगा।
व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
खाद्य सुरक्षा केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। जरूरत है कि:
- पूरे वर्ष नियमित जांच अभियान चलाए जाएं
- स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की भी सघन जांच हो
- लाइसेंस प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए
- उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाए
जब तक निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक रांची में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग हालात सुधारने के लिए ठोस कदम कब उठाता है।