Jharkhand News: झारखंड के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के सभी शहरी निकायों में कुल मांग 2,519.23 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन अब तक सिर्फ 836.70 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है.
प्रमुख नगर निगमों में भी वसूली की स्थिति संतोषजनक नहीं है. मानगो नगर निगम में, कुल मांग 26.09 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.61 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 18.42 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
इसी तरह, धनबाद नगर निगम में कुल मांग 47.03 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 14.00 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 33.04 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. देवघर नगर निगम में कुल मांग 19.19 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 8.23 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 10.91 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. हजारीबाग नगर निगम में कुल मांग 18.25 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.54 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 10.51 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
आदित्यपुर नगर निगम में कुल मांग 13.48 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 5.04 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 8.37 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. चास नगर निगम में कुल मांग 12.32 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 4.06 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 8.14 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. गिरिडीह नगर निगम में कुल मांग 12.30 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 3.82 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 8.49 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
मेदिनीनगर नगर निगम में कुल मांग 12.59 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 3.67 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 9.05 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
नगर परिषदों में भी वसूली की स्थिति खराब है. रामगढ़ में कुल मांग 7.27 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 2.77 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 4.47 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. फुसरो में कुल मांग 5.19 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.27 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 3.87 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
जुगसलाई में कुल मांग 4.70 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.96 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 2.92 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. गढ़वा में कुल मांग 4.00 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.66 लाख रुपये हुई है, जिससे 3.27 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. चक्रधरपुर में कुल मांग 2.86 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.56 लाख रुपये हुई है, जिससे 2.08 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. चतरा में कुल मांग 2.51 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 4.53 लाख रुपये हुई है, जिससे 2.07 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. झुमरीतिलैया में कुल मांग 9.70 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 2.51 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 7.20 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. लोहरदगा में कुल मांग 2.82 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.17 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 1.64 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. गोड्डा में कुल मांग 2.60 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 1.53 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
गुमला में कुल मांग 2.70 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.91 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.89 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. कोडरमा में कुल मांग 2.37 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 4.68 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.94 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
खूंटी में कुल मांग 2.24 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 6.77 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.46 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. मधुपुर में कुल मांग 2.19 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.08 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 1.05 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. मिहिजाम में कुल मांग 1.75 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 6.79 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.06 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. पाकुड़ में कुल मांग 2.08 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 9.37 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.17 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
साहिबगंज में कुल मांग 3.10 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.43 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 1.62 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. विश्रामपुर में कुल मांग 2.20 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 50 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.70 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.
नगर पंचायतों में भी वसूली की स्थिति चिंताजनक है. सरायकेला में कुल मांग 1.53 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 35.21 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.17 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. सिमडेगा में कुल मांग 1.44 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 53.93 लाख रुपये हुई है, जिससे 88.74 लाख रुपये की राशि बकाया है.
नगर उंटारी में कुल मांग 1.49 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 2.83 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.21 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. हरिहरगंज में कुल मांग 1.50 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 2.39 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.29 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. कपाली में कुल मांग 1.92 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 7.66 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.25 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. लातेहार में कुल मांग 1.76 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 5.49 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.26 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. दुमका में कुल मांग 2.45 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 9.22 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.48 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. जामताड़ा में कुल मांग 1.82 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 6.40 लाख रुपये हुई है, जिससे 1.18 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. बुंडू में कुल मांग 1.14 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 37.88 लाख रुपये हुई है, जिससे 77.14 लाख रुपये की राशि बकाया है. चाईबासा में कुल मांग 2.41 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 1.17 करोड़ रुपये हुई है, जिससे 1.20 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. बरहरवा में कुल मांग 78.81 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 39.90 लाख रुपये हुई है, जिससे 38.89 लाख रुपये की राशि बकाया है. बासुकीनाथ में कुल मांग 60.08 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 24.63 लाख रुपये हुई है, जिससे 34.82 लाख रुपये की राशि बकाया है.
धनवार में कुल मांग 71.57 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 31.69 लाख रुपये हुई है, जिससे 39.89 लाख रुपये की राशि बकाया है. महगामा में कुल मांग 62.22 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 37.61 लाख रुपये हुई है, जिससे 25.79 लाख रुपये की राशि बकाया है. बड़की सराय में कुल मांग 84.83 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 34.46 लाख रुपये हुई है, जिससे 49.63 लाख रुपये की राशि बकाया है. मंझियावां में कुल मांग 52.87 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 8.80 लाख रुपये हुई है, जिससे 44.48 लाख रुपये की राशि बकाया है. छत्तरपुर में कुल मांग 1.04 करोड़ रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 41.56 लाख रुपये हुई है, जिससे 64.38 लाख रुपये की राशि बकाया है. चाकुलिया में कुल मांग 25 लाख रुपये है, लेकिन वसूली सिर्फ 24.85 लाख रुपये हुई है, जिससे कुछ ही राशि बकाया है.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि शहरी निकायों में राजस्व वसूली की रफ्तार अभी भी अपेक्षा से काफी कम है. बड़ी राशि बकाया रहने से निकायों की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है. यह स्थिति शहरी निकायों के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें अपने विकास कार्यों और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है.