Sujit Sinha Encounter: झारखंड के कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा के जामताड़ा में पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा एक बार फिर सुर्खियों में है. वर्तमान में झारखंड की चाईबासा जेल में बंद रिया सिन्हा केवल एक अपराधी की पत्नी नहीं, बल्कि पूरे गैंग की मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड के रूप में काम कर रही थी. कुख्यात सुजीत सिन्हा पर जहां पलामू, लातेहार, रांची, चतरा और हजारीबाग समेत कई जिलों में हत्या, रंगदारी, फायरिंग, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध के 60 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे (जिनमें सबसे अधिक 20 से ज्यादा मामले केवल पलामू जिले में थे), वहीं उसकी पत्नी रिया सिन्हा पर भी करीब एक दर्जन संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं.
जेल में सुजीत और विदेश में प्रिंस खान; बाहर रिया संभालती थी पूरे गिरोह की कमान
पुलिस जांच में सामने आया कि रिया सिन्हा केवल एक सहयोगी नहीं थी, बल्कि वह सुजीत सिन्हा और धनबाद के कुख्यात प्रिंस खान के गिरोह के बीच सबसे मुख्य संपर्क सूत्र (कनेक्टिंग लिंक) के रूप में काम कर रही थी. सुजीत सिन्हा जहां पलामू, गुमला और घाघीडीह जैसी जेलों में बंद था, वहीं प्रिंस खान विदेश में बैठकर अपने गिरोह का संचालन कर रहा था. जेल के बाहर इस पूरे आपराधिक नेटवर्क, रंगदारी वसूली और दोनों गिरोहों के बीच समन्वय स्थापित करने की कमान रिया सिन्हा ने संभाल रखी थी. रांची के तत्कालीन सिटी एसपी पारस राणा और एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने अक्टूबर 2025 में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए रिया सिन्हा सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.
रिया के माध्यम से चलता था नेटवर्क और तथाकथित “शांति सेना”
जांच के अनुसार, रिया सिन्हा के माध्यम से ही दोनों गिरोहों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, हथियारों की व्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों का समन्वय किया जाता था. राजधानी रांची में प्रिंस खान के नाम पर कारोबारियों, बिल्डरों, ठेकेदारों और कोयला व्यापारियों से की गई रंगदारी की अधिकांश कॉल इसी गठजोड़ का हिस्सा थीं. इसके अलावा, कोयलांचल और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय तथाकथित "शांति सेना" का संचालन भी रिया सिन्हा के जरिए ही किया जा रहा था. रंगदारी न देने पर सीधे शूटर्स भेजकर गोलीबारी करवाई जाती थी.
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियारों की आपूर्ति और पंजाब का मोगा कनेक्शन
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय क्राइम नेटवर्क से जुड़े बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. आरोपियों ने स्वीकार किया कि सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान के गिरोह के लिए अत्याधुनिक हथियार और गोलियां सीधे पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से पंजाब के मोगा इलाके तक पहुंचाई जाती थीं. पंजाब के मोगा से इन हथियारों को विभिन्न गुप्त माध्यमों से झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में लाया जाता था. इन्हीं हथियारों के बल पर बड़े उद्योगपतियों और व्यवसायियों में दहशत फैलाकर करोड़ों की रंगदारी (लेवी) वसूली जाती थी.
लेवी वसूली का पैसा यूएई के रास्ते भेजा जाता था पाकिस्तान
जांच में सामने आया कि रांची में इनामुल हक उर्फ बबलू खान अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान गिरोह के लिए रंगदारी/लेवी वसूलने का काम करता था. वसूली गई इस मोटी रकम को सुजीत सिन्हा के गुर्गों के माध्यम से प्रिंस खान तक पहुंचाया जाता था, जिसके बाद इस राशि को यूएई (UAE) के हवाला रास्ते से पाकिस्तान भेजा जाता था. इस पैसे का इस्तेमाल दोबारा से नए अवैध हथियार खरीदने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने में किया जाता था.
डोरंडा सत्यभामा अपार्टमेंट फायरिंग और BIT मेसरा ओपी में UAPA के तहत दर्ज केस
डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित सत्यभामा अपार्टमेंट के बाहर हुई हवाई फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार भी इसी पाकिस्तान-मोगा नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराए गए थे. इस पूरे गिरोह के खिलाफ रांची के सदर थाना (BIT मेसरा ओपी) में कांड संख्या 512/2025 (दिनांक 22 अक्टूबर 2025) के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और अति-गंभीर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. फिलहाल चाईबासा जेल में बंद रिया सिन्हा से जुड़े इस पूरे नेटवर्क पर पुलिस अपनी आगे की कानूनी शिकंजा कस रही है.