Ranchi News: भाजपा प्रदेश कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में आदिवासी अधिकारों, जनसंख्या के बदलते आंकड़ों और आदिवासी जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने विशेष रूप से संथाल परगना में आदिवासी आबादी के प्रतिशत में कमी और मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
झारखंड गठन के आंदोलन का किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अलग झारखंड राज्य की मांग आजादी के बाद से ही उठती रही, लेकिन कांग्रेस ने लंबे समय तक इस मांग की अनदेखी की। उन्होंने झारखंड आंदोलन से जुड़े जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर आदिवासी समाज के साथ छल करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के पीछे आदिवासी समाज का लंबा संघर्ष रहा है और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
जनगणना के आंकड़ों का दिया हवाला
मरांडी ने 1951 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड क्षेत्र में आदिवासी आबादी का प्रतिशत 35.38 से घटकर 26.20 प्रतिशत रह गया है। वहीं, मुस्लिम आबादी के प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है और यह 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने संथाल परगना के आंकड़ों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, 1951 में इस क्षेत्र में आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 28.11 प्रतिशत रह गई।
पाकुड़ में आदिवासी जमीन पर कब्जे का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में आदिवासी जमीन पर कथित कब्जे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि आदिवासी कल्याण समिति की ओर से सरकार और केंद्र को भेजे गए पत्र में कई इलाकों में फर्जी दान पत्र के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जे की शिकायत की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी जमीनों पर इमारतों, कारखानों, मदरसों और मस्जिदों का निर्माण किया गया है। मरांडी ने राज्य सरकार पर वोट बैंक की राजनीति के चलते इस मामले में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
मिशनरियों पर भी लगाए आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान मरांडी ने मिशनरियों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आदिवासियों पर एक रैली में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर रैली में शामिल नहीं होने पर जुर्माना लगाने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।
परिसीमन के बीच संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा
परिसीमन को लेकर आदिवासी अधिकारों पर जारी चर्चा के बीच बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संविधान में आदिवासी समाज को मिले अधिकार सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने आदिवासी समाज से कांग्रेस और मिशनरियों के बहकावे में नहीं आने की अपील करते हुए अपने अधिकारों और हितों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।